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14 घंटे तक लगातार करता है प्रजनन, फिर हो जाती है मौत! ऑस्ट्रेलिया के इस छोटे जीव का अनोखा जीवनचक्र वैज्ञानिकों को भी करता है हैरान

 


नई दिल्ली: प्रकृति अपने भीतर ऐसे अनगिनत रहस्य समेटे हुए है, जिन्हें जानकर अक्सर लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं। पृथ्वी पर मौजूद हर जीव की अपनी अलग जीवनशैली, व्यवहार और प्रजनन प्रणाली होती है। अधिकांश जीवों का उद्देश्य अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाना होता है, लेकिन कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं जिनमें प्रजनन की प्रक्रिया ही जीवन का अंतिम चरण बन जाती है। ऐसा ही एक अनोखा जीव है एंटेचिनस (Antechinus), जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक छोटा थैलीदार स्तनपायी (मार्सुपियल) है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस जीव का प्रजनन व्यवहार दुनिया के सबसे असाधारण उदाहरणों में गिना जाता है। प्रजनन काल के दौरान नर एंटेचिनस कई घंटों तक लगातार मादा के साथ मैथुन करता है और इस दौरान उसका शरीर इतनी अधिक ऊर्जा खर्च कर देता है कि कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो जाती है। यह घटना जीवविज्ञान और विकासवाद (Evolution) के अध्ययन में लंबे समय से शोध का विषय बनी हुई है।

क्या है एंटेचिनस?

एंटेचिनस ऑस्ट्रेलिया और आसपास के कुछ क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक छोटा मांसाहारी मार्सुपियल है। आकार में यह चूहे जैसा दिखाई देता है, लेकिन जैविक रूप से यह चूहा नहीं है। इसके शरीर पर घने बाल होते हैं और यह मुख्य रूप से जंगलों, झाड़ियों तथा पर्वतीय इलाकों में रहता है।

यह जीव कीड़े-मकोड़ों, मकड़ियों, छोटे सरीसृपों और अन्य छोटे जीवों को खाकर अपना जीवन बिताता है। सामान्य दिनों में यह बेहद सक्रिय और फुर्तीला होता है, लेकिन जैसे ही प्रजनन का मौसम आता है, इसके व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

14 घंटे तक लगातार प्रजनन

वैज्ञानिकों के अनुसार नर एंटेचिनस प्रजनन काल में कई-कई घंटों तक लगातार मैथुन कर सकता है। कुछ अध्ययनों में यह अवधि लगभग 12 से 14 घंटे तक दर्ज की गई है।

इस दौरान नर भोजन, आराम और नींद की परवाह किए बिना लगातार प्रजनन में लगा रहता है। कई बार वह एक से अधिक मादाओं के साथ भी मैथुन करता है। उसका पूरा जैविक तंत्र केवल एक उद्देश्य पर केंद्रित हो जाता है—अधिक से अधिक संतानों को जन्म देने की संभावना बढ़ाना।

यही वजह है कि वैज्ञानिक इस व्यवहार को जीव-जगत की सबसे चरम प्रजनन रणनीतियों में से एक मानते हैं।

आखिर क्यों हो जाती है नर की मौत?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी लंबी प्रजनन प्रक्रिया के बाद नर की मृत्यु क्यों हो जाती है?

शोधकर्ताओं के अनुसार इसका मुख्य कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन हैं। प्रजनन के मौसम में नर एंटेचिनस के शरीर में टेस्टोस्टेरोन और विशेष रूप से कोर्टिसोल जैसे तनाव संबंधी हार्मोन का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है।

जब कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है, तब शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) कमजोर पड़ने लगता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर संक्रमणों से लड़ने की क्षमता खो देता है। साथ ही अत्यधिक ऊर्जा खर्च होने के कारण मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और कई अंगों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से कई नर एंटेचिनस प्रजनन काल समाप्त होने के कुछ समय बाद ऑर्गन फेलियर, संक्रमण या अत्यधिक शारीरिक तनाव के कारण मर जाते हैं।

विकासवाद की अनोखी रणनीति

जीवविज्ञान में इस प्रकार के व्यवहार को Semelparity (सेमेलपैरिटी) कहा जाता है। इसका अर्थ है कि कोई जीव अपने जीवन में केवल एक बार बड़े पैमाने पर प्रजनन करता है और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाती है।

यह रणनीति उन जीवों में विकसित हुई है जिनका जीवनकाल अपेक्षाकृत छोटा होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एंटेचिनस के लिए अधिकतम ऊर्जा को एक ही प्रजनन मौसम में खर्च करना विकासवादी दृष्टि से लाभदायक साबित हुआ।

इससे अधिक संख्या में संतानों के जन्म की संभावना बढ़ जाती है और प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है।

मादा क्यों करती है कई नरों से प्रजनन?

एंटेचिनस की मादा केवल एक नर पर निर्भर नहीं रहती। वैज्ञानिकों के अनुसार वह कई नरों के साथ मैथुन कर सकती है।

इस व्यवहार का उद्देश्य बेहतर आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) प्राप्त करना माना जाता है। अलग-अलग नरों से प्राप्त जीन के कारण संतानों के स्वस्थ और अधिक अनुकूल होने की संभावना बढ़ जाती है।

यही कारण है कि इस प्रजाति में प्राकृतिक चयन (Natural Selection) बहुत प्रभावी माना जाता है।

बच्चों की पूरी जिम्मेदारी मादा पर

प्रजनन के बाद नर की मृत्यु हो जाने के कारण संतानों की देखभाल पूरी तरह मादा करती है।

मार्सुपियल होने के कारण एंटेचिनस के बच्चों का जन्म बहुत छोटे आकार में होता है। जन्म के बाद वे मां की थैली (Pouch) में जाकर विकसित होते हैं। वहां उन्हें सुरक्षा और पोषण मिलता है।

जब बच्चे पर्याप्त विकसित हो जाते हैं, तब वे धीरे-धीरे बाहर निकलकर स्वतंत्र जीवन जीना शुरू करते हैं।

क्या मादा नर को खा जाती है?

कुछ लोकप्रिय रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जाता है कि मादा प्रजनन के बाद नर के शरीर को खा जाती है। हालांकि वैज्ञानिक साहित्य में यह व्यवहार एंटेचिनस की सामान्य और नियमित विशेषता के रूप में स्थापित नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ परिस्थितियों में मृत शरीर का उपयोग भोजन के रूप में किए जाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं, लेकिन इसे इस प्रजाति का सार्वभौमिक व्यवहार नहीं माना जाता। इसलिए इस विषय में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

केवल एंटेचिनस ही नहीं, अन्य जीव भी हैं अनोखे

प्रकृति में कई अन्य जीव भी ऐसे हैं जिनका प्रजनन व्यवहार बेहद विचित्र माना जाता है।

कुछ मकड़ियों की प्रजातियों में मादा मैथुन के बाद नर को खा जाती है। कुछ कीटों और समुद्री जीवों में भी नर प्रजनन के बाद जीवित नहीं रह पाते। वहीं प्रशांत महासागर की कुछ सैल्मन मछलियां भी अंडे देने के बाद मर जाती हैं।

इन सभी उदाहरणों से पता चलता है कि प्रकृति में प्रत्येक प्रजाति ने अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अलग-अलग विकासवादी रणनीतियां अपनाई हैं।

वैज्ञानिक क्यों कर रहे हैं लगातार शोध?

एंटेचिनस पर दुनिया भर के जीवविज्ञानी लगातार अध्ययन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य यह समझना है कि अत्यधिक तनाव, हार्मोनल परिवर्तन और प्रतिरक्षा तंत्र के बीच क्या संबंध होता है।

इस शोध से केवल वन्यजीवों की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि तनाव, हार्मोन और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े मानव चिकित्सा अनुसंधानों को भी नई दिशा मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अध्ययन भविष्य में हार्मोन संबंधी बीमारियों और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़े कई वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर खोजने में सहायक हो सकते हैं।

एंटेचिनस का जीवनचक्र यह दर्शाता है कि प्रकृति कितनी विविध और आश्चर्यजनक है। यह छोटा सा ऑस्ट्रेलियाई मार्सुपियल अपने पूरे जीवन की ऊर्जा एक ही प्रजनन मौसम में लगा देता है और इसके बाद अधिकांश नर जीवित नहीं बचते। वैज्ञानिक इसे विकासवाद की एक अनूठी रणनीति मानते हैं, जिसने इस प्रजाति को लाखों वर्षों तक जीवित बनाए रखा है।

हालांकि इस जीव का व्यवहार आम लोगों को हैरान कर सकता है, लेकिन जीवविज्ञान की दृष्टि से यह प्राकृतिक चयन और प्रजाति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यही कारण है कि एंटेचिनस आज भी वैज्ञानिकों के लिए गहन शोध और अध्ययन का आकर्षक विषय बना हुआ है।

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